Subhash Chandra Bose in Hindi – जानिए कौन है नेताजी सुभाष..

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Subhash Chandra Bose in Hindi आज भारत की आजादी को बीते हुए लगभग 70 वर्ष से भी अधिक हो गए है,और वही भारत को आजाद कराने वाले अनेक स्वतंत्रता सेनानी ने अपना अहम योगदान तथा अपना जीवन इसके लिए न्योछावर कर दिया , उनमे से एक है, सुभाषचंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) जिनकी आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका रही। इसलिए आज हम इन्ही के जीवन के बारे में चर्चा करेंगे। तो चलिए शुरू करते है।

सुभाष चंद्र बोस – एक स्वतंत्रता सेनानी

सुभाष चंद्र बोस (Subhas Chandra Bose) जिन्हे नेताजी के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के स्वतन्त्रता संग्राम के अग्रणी तथा सबसे बड़े नेता थे। जिनका जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में हुआ था। उनके द्वारा बोला गया जय हिन्द का नारा भारत का राष्ट्रीय नारा बन गया है। साथ ही “तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा” का नारा भी आंदोलन के समय काफी लोकप्रिय हुआ। जिसके चलते भारतवासी उन्हें नेता जी के नाम से सम्बोधित करते हैं। सुभाष चंद्र बोस भारतीय राष्ट्र कांग्रेस के सदस्य थे, जिन्हे 1938 और 1939 में दो बार कांग्रेस के अध्यक्ष चुना गया।

नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जीवन परिचय | Subhash Chandra Bose Facts In Hindi

नामसुभाष चंद्र बोस
अन्य नामनेताजी
जन्म 23 जनवरी 1897
जन्मस्थानउड़ीसा
कार्यस्वतंत्रता सेनानी
परिवारपिता – जानकीनाथ बोस
माता – प्रभावती देवी
पत्नी – ऐमिली शिंकल
शिक्षाप्रेज़िडेंसी कॉलेज, स्कॉटिश चर्च कॉलेज, के ब्रिज विश्वविद्यालय (स्नातक)
प्रसिद्धस्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता के रूप में
निधन18 अगस्त, 1945
मृत्यु स्थानताइपे सिटी हॉस्पिटल हेपिंग फुयू ब्रांच, ताइपे, ताइवान
उम्र ( मृत्यु के समय)48 वर्ष की आयु में
राष्ट्रीयताभारतीय
Subhash Chandra Bose biography in Hindi

सुभाष चंद्र बोस के बारे में | about Subhash Chandra Bose In Hindi

नेताजी कहे जाने वाले सुभाषचंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उडीसा के कटक नामक स्थान पर हुआ । परिवार में उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस था, जो की एक प्रसिद्ध वकील थे, तथा उनकी माता का नाम प्रभावती देवी था । जानकीनाथ और प्रभावती की कुल मिलाकर 14 संतान थी, जिनमे 6 बेटी 8 बेटे थे, तथा उनमें सुभाषचंद्र बोस नौवी सन्तान थे। उनके पिता बंगाल विधानसभा के सदस्य भी रहे | अंग्रेजो ने सुभाष के पिता जानकीनाथ बोस को रायबहादुर का खिताब दिया था।

सुभाष चंद्र बोस का इतिहास | History of Subhash Chandra Bose in hindi

सुभाषचंद्र बोस Subhas Chandra Bose विवेकानंद की शिक्षाओं से बहुत प्रभावित रहे उन्होंने कटक के प्रोटेस्टैंड स्कूल से प्राइमरी शिक्षा पूरी की। और बाद में रेवेनशा कॉलेज में दाखिला लिया। मात्र पंद्रह साल की उम्र में विवेकानंद साहित्य का अध्यन किया तथा छात्र जीवन से ही देश-प्रेम की भावना के लिए प्रसिद्ध रहे। साल 1919 में वे इंडियन सिविल सर्विस की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए इंग्लैंड चले गए जहां वे चौथे स्थान पर सफल उत्तीर्ण हुए। लेकिन जब जलियांवाला बाग़ हत्याकांड की खबर सुनी तो उन्होंने से सिविल सर्विस से त्यागपत्र दे दिया और देश भारत वापस लौट आये | उस समय एक ओर स्वतंत्रता सेनानी चितरंजन दास काफी लोकप्रिय थे, अपने प्रिय नाम देशबन्धु के लिए। उनसे प्रेरित होकर स्वतंत्रता आन्दोलन में जुट गये।

प्रसिद्ध युवा नेता बनने की कहानी

यहां से सुभाषचंद्र के जीवन में एक नया मोड़ आया क्योंकि सुभाष चंद्र बोस 20 जुलाई 1921 को महात्मा गांधी से मिले जो उस समय अंग्रेजो के विरुद्ध असहयोग आन्दोलन का नेतृत्व कर रहे थे। वही दूसरी ओर चितरंजन दास ने 1923 में स्वराज्य पार्टी की स्थापना की, जहां सुभाषचंद्र बोस ने महापालिका का चुनाव लड़ा और जीता। अपने कार्यकाल में वहां काम करने का तरीका भी बदल डाला उन्होंने कलकत्ता के रास्तो के अंग्रेजी नाम बदलकर भारतीय नाम दिए, तथा स्वतंत्रता संग्राम में प्राण न्योछावर करने वाले परिवारजनों के सदस्य को महापालिका में नौकरी मिलने लगी जिसके चलते वह बहुत जल्द ही एक प्रसिद्ध युवा नेता बन गये।

यहां से भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु के साथ सुभाषचंद्र बोस ने कांग्रेस के अंतर्गत युवको की independence League शुरू की | वर्ष 1928 में जब भारत में साइमन कमीशन आया तो कांग्रेस ने काले झंडे दिखाए और उसका विरोध किया | साथ ही कांग्रेस ने विरोध करते हुए भावी सविधान का कार्य आठ सदस्य को सोपा जिसमे से एक सुभाषचंद्र भी शामिल थे, वही मोती लाल नेहरू इसके अध्यक्ष थे। 1928 के वार्षिक अधिवेशन मोतीलाल नेहरू के अध्यक्षता में हुआ। जहां सुभाष चंद्र बोस ने खाकी गणेशव के रूप में सैन्य तरीके से सलामी दी।

कई बार दी गई सजा

सुभाष अपने जीवनकाल के दौरान कई बार जेल में रहे, उन्हें 11 बार कारावास हुआ | सबसे पहले उन्हें 16 जुलाई 1921 को छह महीने की सजा हुई, उन्हें मांडले कारागृह तथा अल्मोड़ा जेल में दिन बिताने पड़े। 1933-36 तक सुभासचन्द्र बोस यूरोप में रहे। इटली के नेता मुसोलिनी से मिले जिन्होंने उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम में सहायता करने का वचन दिया | 1938 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हरीपूरा में हुआ तथा वे अध्यक्ष बने।

तुम मुझे खून दो , मै तुम्हे आजादी दूंगा का दिया नारा

इसके बाद उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया और त्यागपत्र देने के बाद 3 मई 1939 को फॉरवर्ड ब्लॉक के नाम से अपनी पार्टी की स्थापना की एवं स्वतंत्रता संग्राम को तीव्रगति दी। जर्मनी में भी उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संघठन और आजाद हिन्द रेडियो की स्थापना की | 29 मई 1942 को एडोल्फ हिटलर से पहली मुलाकात हुई । भारतीय युद्धबन्दियो को लेकर आजाद हिन्द फ़ौज का गठन किया। औरतो के लिए झांसी रानी रेजिमेंट बनाई। पूर्व एशिया में जगह जगह भाषण देकर फ़ौज में भर्ती होने के लिए स्थानीय लोगो को आह्वान किया तथा संदेश दिया “तुम मुझे खून दो , मै तुम्हे आजादी दूंगा

सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु | Death of Subhash Chandra Bose in hindi

18 अगस्त 1945 को सुभाष चंद्र बोस हवाई जहाज से मंचूरिया की तरफ जा रहे थे। इस सफर के दौरान वे लापता हो गये। इस दिन के बाद वे कभी किसी को दिखायी नहीं दिये।

23 अगस्त 1945 को टोकियो रेडियो ने बताया कि उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में उनके कुछ अन्य लोग मारे गये। नेताजी गम्भीर रूप से जल गये थे। उन्हें ताइहोकू सैनिक अस्पताल ले जाया गया जहाँ उन्होंने दम तोड़ दिया। भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त दस्तावेज़ के अनुसार नेताजी की मृत्यु 18 अगस्त 1945 को ताइहोकू के सैनिक अस्पताल में हुई थी।

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नोट- यह संपूर्ण बायोग्राफी का श्रय सुभाष चंद्र जी को देते हैं क्योंकि ये पूरी जीवनी उन्हीं के जीवन पर आधारित है और उन्हीं के जीवन से ली गई है। उम्मीद करते हैं यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। हमें कमेंट करके बताइयेगा कि आपको यह आर्टिकल कैसा लगा?

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