Lal Bahadur Shastri in Hindi | देश के दूसरे प्रधानमंत्री

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Second PM of india

Lal Bahadur Shastri in Hindi – आपने बहुत से प्रधानमंत्री के बारे में तो सुना होगा, जिन्होंने अपने कार्यालय के दौरान देश को संभाला, लेकिन आज हम जिस प्रधानमंत्री के बारे में बात करने जा रहे, उन्होंने न केवल देश की गद्दी को संभाला बल्कि देश को भुखमरी से भी बचाया, कई आंदोलन में अपना अहम योगदान दिया। दोस्तों वह कोई और नहीं देश के दूसरे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ही थे। आज हम इन्ही के जीवन के बारे में जानेंगे। तो चलिए शुरू करते है।

about Lal Bahadur Shastri in hindi | बहादुर शास्त्री के बारे में

लाल बहादुर शास्त्री एक भारतीय राजनेता थे, जिनका जन्म 2 अक्टूबर 1904 उत्तर प्रदेश में हुआ था। शास्त्री जी ने जय जवान जय किसान का नारा दिया। यह भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे , जिन्होंने 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक इस पद को संभाला। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री भारत के तीसरे रेल मंत्री और छटवें गृह मंत्री भी रहे। यही नहीं उन्होंने तीसरे विदेश मंत्री के तौर पर 9 जून 1964 – 18 जुलाई 1964 तक कार्य किया। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री ने अपने जीवन की अंतिम साँस ली।

Lal Bahadur Shastri biography in Hindi | लाल बहादुर शास्त्री का जीवन परिचय

name/नामलाल बहादुर शास्त्री
nickname/उपनाममैन ऑफ पीस नन्हे
DOB/जन्म तिथि 2 अक्टूबर 1904
birthplace/जन्म स्थानउत्तर प्रदेश (मुगलसराय)
profession/पेशाराजनेता, स्वतंत्रता सेनानी
family/परिवारपिता – शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
माता – रामदुलारी देवी
wife/पत्नीललिता शास्त्री
religion/धर्महिन्दू धर्म
pM work/पीएम कार्य9 जून 1964 – 11 जनवरी 1966
Minister/मंत्रीभारत के दूसरे प्रधानमंत्री,
तीसरे विदेश मंत्री
6 वें गृह मंत्री,
तीसरे रेल मंत्री
education/शिक्षाकाशी विद्यापीठ से स्नातक 
award/पुरस्कारभारत रत्न (1966) (मरणोपरांत)
nationality/राष्ट्रीयताभारतीय
Lal Bahadur Shastri in Hindi

Lal Bahadur Shastri history in Hindi | लाल बहादुर शास्त्री का इतिहास

भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को ब्रिटिश साम्राज्य के दौरान उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ था। परिवार में इनके पिता का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव और माँ का नाम रामदुलारी देवी था। शास्त्री जी के पिता की बचपन में ही मौत होने के चलते शास्त्री जी अपनी मां के साथ नाना के यहां मिर्जापुर आ गए, जहाँ उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त की।

आर्थिक हालत कुछ ठीक नहीं थे, लेकिन उन्होंने मुश्किल परिस्थिति में भी अपनी पढाई जारी रखी। कहा जाता है की, शास्त्री जी स्कूल नदी तैरकर रोज़ स्कूल जाते थे , क्योकि उस समय गांव में बहुत ही कम स्कूल होते थे और वो भी दूर दूर। 12 वर्ष की आयु में शास्त्री जी ने अपना उपनाम ‘श्रीवास्तव’ हटा दिया, क्योकि शास्त्री जी के अंदर जाति-व्यवस्था को लेकर बचपन से घृणा थी। बाद में काशी विद्यापीठ से शिक्षा ग्रहण करने के बाद स्नातक की पढाई पूरी की और शास्त्री की उपाधि प्राप्त की।

राजनीति की शुरुआत

लाल बहादुर शास्त्री को शुरू से ही देश के लिए कुछ करना था, 1951 में नई दिल्ली आने के बाद उन्होंने राजनीती में कदम रखा और जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल के कई विभागों का प्रभार संभाला। बाद में वह देश के तीसरे रेल मंत्री के तौर पर नियुक्त किये गए, जिनका कार्यलय 13 मई 1952 से 7 दिसंबर 1956 तक रहा। यही नहीं इसके आलावा शास्त्री जी ने परिवहन एवं संचार मंत्री, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री का पद संभाला। जब वर्ष 1952 में वे रेल मंत्री बने, तब 1956 में तमिलनाडु में एक ट्रेन दुर्घटना में 150 यात्रियों की मौत के चलते उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

बाद में उन्होंने दूध के उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने के महत्व को समझते हुए श्वेत क्रांति को बढ़ावा दिया। साथ ही भारत के खाद्य उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने हरित क्रांति को महत्त्व दिया।

साल 1961 में लाल बहादुर शास्त्री को देश के छटवें गृह मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया , जहाँ उनका कार्यलय 4 अप्रैल 1961 से 29 अगस्त 1963 तक रहा। उनके कार्यकाल के दौरान पहली बार महिला कंडक्टरों की नियुक्ति की गई थी। इसके कुछ महीनो बाद इन्होने तीसरे विदेश मंत्री के रूप में पद ग्रहण किया।

बने देश के दूसरे प्रधानमंत्री

जब लाल बहादुर शास्त्री ने विदेश मंत्री का पद ग्रहण किया, तब उसी दिन 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री को जवाहरलाल नेहरू के बाद देश का दूसरा प्रधानमंत्री बनाया गया. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कई काम किये। उनका यह कार्यकाल 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 तक करीब अठारह महीना का रहा। शास्त्री के प्रधानमंत्री बनने के बाद 1965 में भारत पाकिस्तान का युद्ध हुआ, जिसमें शास्त्री जी ने विषम परिस्थितियों में देश को संभाले रखा। उस समय उन्होंने जय जवान जय किसान’ का नारा भी दिया।

5,000 रुपए लोन लेकर खरीदी कार

प्रधानमंत्री के पद के दौरान उनके परिवार ने उन्हें एक कार खरीदने के लिए कहा था। उन्होंने जो फिएट कार खरीदी वह 12,000 रुपये में थी। लेकिन उनकेपास केवल 7,000 रुपये थे, और कार लेने के लिए उन्हें पांच हज़ार रुपए की आवश्कता थी. इसलिए उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से 5,000 रुपये लॉन लेकर कार ली। कार को आज भी नई दिल्ली के शास्त्री मेमोरियल में रखा गया है।

Lal Bahadur Shastri death | लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु

  • अपने जीवनकाल में सबसे सफल प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ने 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में अपने जीवन की अंतिम साँस ली।

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नोट– यह संपूर्ण बायोग्राफी का क्रेडिट हम लाल बहादुर शास्त्री को देते हैं, क्योंकि ये पूरी जीवनी उन्हीं के जीवन पर आधारित है और उन्हीं के जीवन से ली गई है। उम्मीद करते हैं यह आर्टिकल आपको पसंद आया होगा। हमें कमेंट करके बताइयेगा कि आपको यह आर्टिकल कैसा लगा?