Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi | अटल बिहारी वाजपेयी जीवनी

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अटल बिहारी वाजपेयी का जीवन परिचय – उम्र, विकी, राजनीतिक करियर, पुरस्कार, करियर, मृत, माता-पिता, जन्मतिथि और राजनीतिक दल ( Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi- age, wiki, political career, awards, career, death, parents, DOB, and political party )

अटल बिहारी वाजपेयी कौन है? ( Who is Atal Bihari Vajpayee )

अटल बिहारी वाजपेयी एक ऐसे राजनेता थे, जिन्होंने अपने प्रधानमंत्री शासनकाल में अच्छे-अच्छे राजनेताओं को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उन्होंने अपने शासनकाल में इन्होने भाजपा जनता पार्टी को एक नई ऊंचाई दी जिससे भारतीय जनता पार्टी आगे चलकर एक प्रसिद्ध तथा लोकप्रिय पार्टी बनकर सामने आई। यही ऐसे राजनेता थे जो अपनी बुलंद आवाज के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध थे, खासकर जब यह भाषण देने आते थे तब लोगों की भीड़ उमड़ आती थी। इसलिए आज हम अटल बिहारी वाजपेई से जुड़ी हर जानकारी आपको देने का प्रयास करेंगे।

अटल बिहारी वाजपेयी एक भारतीय राजनेता तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता थे। उनका जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। यह भारत के तीन बार प्रधानमंत्री बनने वाले पहले राजनेता है। अटल बिहारी वाजपेयी को 1996, 1998 और फिर 1999 को भारत का प्रधानमंत्री घोषित किया गया था। इन्होंने अपने शासन का कार्यालय बहुत ही निपुण तथा ईमानदारी से निभाया था, जिसके चलते यह भारत के प्रसिद्ध राजनेताओं में से एक हैं। अटल बिहारी वाजपेयी 16 अगस्त 2018 को दुनिया को अलविदा कह गए थे।

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi- age, DOB and more..

question ( सवाल )answer ( उत्तर )
name/नाम अटल बिहारी वाजपेयी
DOB/जन्म तिथि 25 दिसंबर 1924 को ( ग्वालियर )
Age/उम्र93 वर्ष ( 2018 के अनुसार )
profession/पेशा भारतीय राजनेता
parents/माता-पिताकृष्णा बिहारी वाजपेयी /कृष्णा देवी
political party/राजनीतिक दलBJP ( भारतीय जनता पार्टी )
religion/धर्महिंदू ब्राह्मण
PM in india/भारत में पीएमतीन बार
death/मृत्यु 16 अगस्त 2018
mission/मिशनऑपरेशन शक्ति
award/पुरस्कार2015, भारत रत्न
nationality/राष्ट्रीयता भारतीय
Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi

भारत के प्रसिद्ध राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्णा बिहारी वाजपेयी तथा मां का नाम कृष्णा देवी है। अटल बिहारी वाजपेयी के पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी एक कवि होने के साथ-साथ मुरैना गांव के एक स्कूल में प्रधानाध्यापक थे। अटल बिहारी वाजपेयी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई लिखाई गोरखी गांव के एक स्कूल से की, और बाद में विक्टोरिया कॉलेज से अपनी स्नातक की डिग्री पूर्ण प्राप्त की। साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी ने इसके बाद दयानंद कॉलेज से अपनी राजनीतिक विज्ञान में स्नाक्तोक्तर की डिग्री हासिल की।

अटल बिहारी का राजनीतिक करियर ( Atal Bihari Political career )

अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत तब की जब उन्होंने 1942 में उनके बड़े भाई को भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 23 दिन के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था, और ने उन्हें छोड़ दिया गया था। तथा इसके ठीक बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने एक और राजनेता दीनदयाल के साथ मिलकर RSS द्वारा हिंदू राजनीतिक पार्टी ” भारतीय जनता संघ का निर्माण किया। लेकिन यहां से अटल बिहारी वाजपेयी को एक बार जेल का मुंह देखना पड़ा क्योंकि श्याम प्रसाद मुखर्जी के साथ जुड़ने के बाद कश्मीर से जुड़ी समस्याओं के लिए भूख हड़ताल में जेल जाना पड़ा, जिसके कारण अटल बिहारी वाजपेयी के दोस्त श्याम प्रसाद मुखर्जी को भूख हड़ताल के कारण मृत्यु हो गई।

ठीक इसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी को 1957 में लोक सेवा चुनाव जीतने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ लेकिन मथुरा के राजा महेंद्र प्रताप द्वारा उनको हार का मुंह देखना पड़ा। लेकिन यहां से अटल बिहारी वाजपेयी को ज्यादा फर्क नहीं पड़ा उनके भाषण इतने बेबाक होते थे, कि लोग उनके भाषण सुनने के लिए चारों तरफ भीड़ इकट्ठे कर लेते थे। शायद यही कारण है, कि आज अटल बिहारी वाजपेयी भारत के इतने प्रसिद्ध राजनेता थे कि उन्हें भारत का 3 बार प्रधानमंत्री बनने का अवसर प्राप्त हुआ।

अटल बिहारी वाजपेयी को बनाया गया 3 बार प्रधानमंत्री

जैसे कि हमने आपको बताया की अटल बिहारी वाजपेयी भारत के तीन बार प्रधानमंत्री बनने में कामयाब हुए थे, इसके पीछे की वजह थी, 1995 में गुजरात और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनावों में बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी की जीत। यहां से बीजेपी यानी भारतीय जनता पार्टी भारत की सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। साथ ही उस समय के प्रसिद्ध राजनेता लालकृष्ण आडवाणी ने भारतीय जनता पार्टी सभा में अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का प्रधानमंत्री बनने की सलाह दी, जिसके चलते 1996 में लोकसभा चुनाव में बीजेपी जीत के कारण अटल बिहारी वाजपेयी को पहली बार 1996 में भारत के दसवें प्रधानमंत्री बनने की घोषणा की।

कारगिल युद्ध (Kargil War)

अपने इस कार्य में उन्होंने जल्द ही इस्तीफा दे दिया था, लेकिन 1998 में फिर हुए लोकसभा चुनावों में बीजेपी की जीत के कारण अटल बिहारी वाजपेयी को दोबारा भारत का प्रधानमंत्री बनाया गया और अपने इस कार्य में ऑपरेशन शक्ति नाम का एक मिशन चलाया क्योंकि पूरे विश्व जहां परमाणु बम की शक्तियां दिखाने की कोशिश कर रहे थे, इसलिए हमारे अटल बिहारी वाजपेयी ने परमाणु बम की परीक्षण कर दुनिया को यह बताया कि भारत में परमाणु बम में पीछे नहीं है, जरूरत आने पर भारत भी बाकी देशों को जवाब दे सकता है। इसी बीच अटल बिहारी वाजपेयी ने 1999 में दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा प्रारंभ की, लेकिन इसी साल यानी 1999 में कारगिल युद्ध छेड़ने से अटल बिहारी वाजपेयी ने ऑपरेशन विजय नाम का एक मिशन तैयार किया जिसमें सेनाओं की मदद से भारत ने जीत प्राप्त की।

लेकिन इसी दौरान किसी न किसी वजह से लोकसभा भंग होने से भारत में दोबारा चुनाव हुए और 1999 में लोकसभा चुनावों में बीजेपी को 543 सीटों में से 303 सीट जीतकर बहुमत के साथ विजय प्राप्त की, जिसके चलते एक बार फिर हमारे राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का प्रधानमंत्री घोषित किया, यह वह समय था, जब अटल बिहारी वाजपेयी को भारत का 3 बार प्रधानमंत्री बनाया गया था, साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी ने अपने कार्यालय में कुछ मिशन द्वारा भारत को एक नई पहचान दी जिससे विश्व भर में भारत का नाम हुआ।

अटल बिहारी वाजपेयी RSS से जुड़े ( Atal Bihari Vajpayee joined RSS )

अपनी राजनीतिक कैरियर से पहले अटल बिहारी वाजपेयी को आर्य समाज तथा युवा वर्ग का सचिव बनाया गया। जिसके बाद अटल बिहारी वाजपेयी को 1939 में बाबा साहेब आप्टे से प्रभावित होकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ में जुड़ गए। बता दे कि अटल बिहारी वाजपेयी ने बिना शादी किए अपने जीवन को भारत को एक अच्छा देश तथा लोगों को प्रति देश की भावनाओं को एकीकृत करने में समर्पित कर दी।

अटल बिहारी वाजपेई के कुछ प्रमुख रचनाएं –

वाजपेई एक अच्छे राजनेता होने के साथ-साथ एक अच्छे कवि भी थे जिन्होंने अपने द्वारा कई रचनाएं रची जिसमें से, रंग रंग हिंदू मेरा परिचय, मृत्यु या हत्या, अमर आग है, संसद में तीन दशक, अमर बलिदान और राजनीति की रपटीली रहे आदि शामिल है।

अटल बिहारी वाजपेयी की कविताएं

ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था।

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यों लगा ज़िन्दगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूँ,
लौटकर आऊँगा, कूच से क्यों डरूँ?

तू दबे पाँव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर, फिर मुझे आज़मा।

मौत से बेख़बर, ज़िन्दगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी है कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किये,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भँवरों की बाँहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ाँ का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई।

अटल बिहारी वाजपेयी पुरस्कार (Atal Bihari Vajpayee Award )

भारत के भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को देश के विकास के तथा महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए 1992, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था, तथा ठीक इसके बाद 2015 में अटल जी को भारत रत्न से नवाज़ा गया था।

सामान्य प्रश्न ( FAQ )

Q : अटल बिहारी वाजपेयी कौन थे ?
ans : वाजपेयी जी एक भारतीय राजनेता तथा भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता थे।

Q : अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म कब हुआ था ?
ans : 25 दिसंबर 1924 को

Q : अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु कब हुई थी ?
ans : 16 अगस्त 2018 को

Q : अटल बिहारी वाजपेयी को कौन सा पुरुस्कार दिया गया था ?
ans : भारत रत्न 2015 को

Q : अटल बिहारी वाजपेयी के माता- पिता का क्या नाम था ?
ans : पिता कृष्णा बिहारी वाजपेयी और माँ कृष्णा देवी

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नोट – हम इस पूरी बायोग्राफी का श्रेय अटल बिहारी वाजपेयी को देते हैं। क्योकि यह पूरी जीवनी अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन पर आधारित है, हमने बस उनके जीवन पर प्रकाश डालने का एक छोटा सा प्रयास किया है। आपको यह आर्टिकल कैसा लगा हमें कमेंट करके जरूर बताइयेगा और उम्मीद करते है आप इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करेंगे.

This Post Has 2 Comments

    1. mr.rathor

      We are glad to have found what you were looking for, we will try our best to provide better information in future.

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